इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में इस साल एक ऐसा आकर्षण देखने को मिला जिसने भीड़ को सिर्फ खींचा नहीं, बल्कि रुके रहने और समझने पर मजबूर किया—मानसिक स्वास्थ्य पवेलियन। जहाँ मेले में तकनीक और बिजनेस हमेशा की तरह लोगों को आकर्षित करते रहे, वहीं यह पवेलियन मन की शांति, समझ और आत्म-जागरूकता का नया केंद्र बन गया। यही कारण है कि IITF 2025 mental health pavilion awareness इस साल की प्रमुख थीम के रूप में उभर रही है।
Healthy Knots के संस्थापक और Suno Na पहल के लीडर संतोष कुमार के शब्दों में, यह सिर्फ एक पवेलियन नहीं था, यह वह स्थान था जहाँ लोग पहली बार अपने मन की अनकही बातों को समझने लगे। संतोष कई वर्षों से भारत के ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद को जन-जन तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि IITF 2025 का यह सेक्शन जागरूकता की एक नई लहर का संकेत है।
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मानसिक स्वास्थ्य क्या है?
मानसिक स्वास्थ्य केवल डिप्रेशन, एंग्जायटी या किसी बीमारी का न होना नहीं है। यह इससे कहीं अधिक गहरा है। यह इस बात से जुड़ा है कि हम कैसे सोचते हैं, कैसा महसूस करते हैं, कैसे निर्णय लेते हैं और जीवन की चुनौतियों को कैसे संभालते हैं। जिस तरह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन और व्यायाम जरूरी है, उसी तरह मन को स्वस्थ रखने के लिए संवाद, संतुलन और सहयोग जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य क्यों है भारत के लिए प्राथमिक मुद्दा?
भारत में युवाओं और छात्रों पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया तुलना, साइबरबुलिंग, लगातार प्रतिस्पर्धा, रिलेशनशिप तनाव, अकेलापन और डिजिटल थकान जैसी समस्याएँ उनके मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। WHO के अनुसार, दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है और भारत का योगदान इस आँकड़े में बेहद चिंताजनक है।
IITF 2025 mental health pavilion awareness इसी चिंता को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पवेलियन ने लोगों को बताया कि मानसिक स्वास्थ्य कोई विशेष या दुर्लभ मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है।
बातचीत क्यों बनती है इलाज की पहली सीढ़ी?
आज भी मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना कई लोगों के लिए चुनौती होता है। लोग बोलना चाहते हैं, लेकिन समाज, परिवार, जजमेंट के डर और शर्म उन्हें चुप कर देती है। इसके बावजूद सच यही है कि बात करना ही healing की पहली सीढ़ी है। बातचीत समस्याओं की पहचान को आसान बनाती है और मदद लेने की राह खोलती है।
Tele MANAS: मानसिक स्वास्थ्य को घर-घर तक ले जाने का डिजिटल समाधान
IITF के इस पवेलियन में Tele MANAS Delhi, NIMHANS Bengaluru और Central Health Education Bureau (CHEB) की संयुक्त उपस्थिति ने इसे एक मजबूत और भरोसेमंद संरचना दी। यह वह स्थान था जहाँ लोगों ने समझा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवा कितनी आसानी से उपलब्ध हो चुकी है।
आज Tele MANAS mental health services in India 2025 भारत की मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली का एक महत्वपूर्ण डिजिटल स्तंभ बन चुकी हैं। Tele MANAS 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदान करता है जहाँ डॉक्टरों, मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों से मुफ्त में बात की जा सकती है। यह सेवा छात्रों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है और पूरी तरह गोपनीय रहती है।
Healthy Knots के संतोष कुमार ने कहा कि जब हम युवाओं से बात करते हैं, तो पता चलता है कि दर्द है, लेकिन मंच नहीं। Tele MANAS उन युवाओं को सुरक्षित और आसान मंच देता है जहाँ वे खुलकर बात कर सकें।
IITF 2025 का संदेश: मानसिक स्वास्थ्य अब हाशिये का विषय नहीं
IITF 2025 ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत मानसिक स्वास्थ्य को अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक जीवन कौशल के रूप में देख रहा है। तकनीक और व्यापार की भीड़ के बीच यह पवेलियन एक शांत, संवेदनशील और गहरे संवाद का स्थान बन गया, जहाँ लोग केवल देखने नहीं, बल्कि समझने आए।
IITF 2025 के मानसिक स्वास्थ्य पवेलियन ने दिखा दिया है कि भारत मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से समझने और स्वीकार करने के लिए तैयार है। Tele MANAS mental health services in India 2025 जैसी सेवाओं ने इस बदलाव को और मजबूत किया है। इस वर्ष IITF 2025 mental health pavilion awareness और Tele MANAS दोनों ही राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य परिदृश्य के महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर सामने आए हैं।